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Tuesday, September 2, 2014

नितिन गडकरी ने मनरेगा में किए अभूतपूर्व बदलाव

02-सितम्बर-2014 19:44 IST
श्रमिकों में से 50 फीसदी को नहरों के काम में लगाया जाएगा
केंद्रीय खाद्य प्रसंस्‍करण मंत्री श्रीमती हरसिमरत कौर बादल 02 सितंबर, 2014 को नई दिल्‍ली में केंद्रीय सड़क परिवहन व राजमार्ग और शिपिंग मंत्री श्री नितिन गडकरी से मुलाकात करते हुए। (पसूका-हिंदी इकाई)
The Union Minister for Food Processing Industries, Smt. Harsimrat Kaur Badal meeting the Union Minister for Road Transport & Highways and Shipping, Shri Nitin Gadkari, in New Delhi on September 02, 2014.
गंभीर सूखे और सूखे जैसे हालात या अभाव से निपटने के लिए, केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री नितिन गडकरी ने आदेश दिया है कि जिला स्तर पर एजेंसीज द्वारा लिए जाने वाले श्रमिकों में से 50 फीसदी को चेक डेम संरक्षण, पारंपरिक जल स्रोतों, छोटे तालाबों और नहरों से गाद निकालने के काम में लगाया जाएगा। यह निर्णय संदस सदस्यों और स्थानीय जन प्रतिनिधियों द्वारा महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) को भ्रष्टाचार का गढ़ कहे जाने के बाद लिया गया। मनरेगा के बारे में कहा जाने लगा था कि इस ग्रामीण रोजगार योजना से किसी प्रकार की उत्पादक संपत्ति का निर्माण नहीं हो रहा है।

एक प्रेस विज्ञप्ति‍ के जरिए मंत्री ने स्पष्ट किया है कि इस प्रकार के कार्यों के लिए दिहाड़ी श्रमिकों और मशीनरी के संयोजन की आवश्यक होती है। इसमें कुशल घटकों की भागीदारी 49 फीसदी तक बढ़ गई है। कुशल भागीदारी को 40 प्रतिशत से बढ़ाकर 49 प्रतिशत किए जाने का प्रावधान राज्यों को अधिकार संपन्न बनाता है। यदि वे चाहें तो चेक डेम, छोटे सिंचाई तालाबों का काम मशीन से कर सकते हैं और बाकी 51फीसदी का भुगतान वो दिहाड़ी मजदूरी के रुप में कर सकते है।

मंत्री ने आगे कहा कि यदि राज्य कुशल भाग को 40 फीसदी तक सीमित रखना चाहते हैं तो वे ऐसा करने के लिए स्वतंत्र हैं। संसद सदस्यों और जल संरक्षण से जुड़े राजेंद्र सिंह और पोपट राव पंवार जैसे गैर सरकारी संगठनों के कार्यकर्ताओं ने इन बदलावों का स्वागत किया है। उनका कहना है कि मनरेगा में इस प्रकार के बदलावों के जरिए जल संरक्षण के लिए ढ़ांचा विकसित होगा जो सूखे और जल संकट से निपटने में मदद करेगा।

मंत्री ने ग्रामीण विकास मंत्रालय को निर्देश दिया है कि राज्य सरकारों को किए जाने वाले सभी कोष हस्तांत्रण ई-पेमेंट प्लेटफॉर्म के जरिए समय से किए जाएं जिससे कि मजदूरी के भुगतान में एक सप्ताह से अधिक की देरी नहीं हो। (PIB)

विजयलक्ष्मी कासोटिया/एएम/एनए-3473

Thursday, February 6, 2014

आह्वान: 6 फरवरी,11 बजे चलो दि‍ल्‍ली सचि‍वालय!

Wed, Feb 5, 2014 at 11:46 PM

केजरीवाल की पार्टी की गुण्‍डागर्दी का विरोध करें

इनके असली चेहरे को पहचानें

दिल्‍ली के मज़दूरों की न्‍यायसंगत माँगों का पुरजोर समर्थन करें!

साथियो!

पिछले लगभग एक माह से पूरी दिल्‍ली की मज़दूर बस्तियों और औद्योगिक क्षेत्रों में दिल्‍ली मज़दूर यूनियन, उत्‍तर-पश्चिमी दिल्‍ली मज़दूर यूनियन और स्‍त्री मज़दूर संगठन की ओर से माँगपत्रक आन्‍दोलन चलाया जा रहा है। मज़दूरों की माँगें एकदम स्‍पष्‍ट हैं। उनका महज इतना कहना है कि दिल्‍ली के मज़दूरों से किये गये अपने वायदों को पूरा करें।
आखिर इतनी बौखलाहट क्‍यों?
फिर आखिर इस आन्‍दोलन से आम आदमी पार्टी को इतनी बौखलाहट क्‍यों है कि आन्‍दोलन की अभियान टोलियों के साथ जगह-जगह उनके कार्यकर्ता उलझ रहे हैं, गाली-गलौज कर रहे हैं और पर्चे जला रहे हैं। पिछले एक हफ्ते से उत्‍तर-पश्चिमी दिल्‍ली क्षेत्र में लगभग हर रोज़ ‘आप’ के कार्यकर्ताओं ने अभियान टोली के साथ बदसलूकी की, प्रचार सभाओं में बाधा पैदा करके मज़दूरों को तितर-बितर करने की कोशिश की। एक दिन एक प्रचार टोली से पर्चे छीन कर जलाये। यहाँ तक कि शाहाबाद डेयरी स्थित जिस शहीद भगतसिंह पुस्‍तकालय में स्‍त्री और पुरुष मज़दूरों की मीटिंगें और विविध सांस्‍कृतिक कार्यक्रम हुआ करते हैं, रात में उसका बोर्ड कुछ लोग उतार ले गये। फिर वहाँ पत्‍थरबाजी भी की गयी। कल शाम को गाड़ी में सवार पीकर धुत्‍त ‘आप’ पार्टी के कुछ लोगों ने बादली में प्रचार टोली की स्‍त्री सदस्‍यों के साथ गाली-गलौज की और धमकियाँ दीं, फिर मज़दूरों के इकट्ठा होने पर वे वहाँ से चले गये!पहली बात, यही वह लोकतांत्रिक संस्‍कृति है, जिसकी केजरीवाल, सिसोदिया और योगेन्‍द्र यादव दुहाई देते नहीं थकते? मज़दूरों के नितान्‍त शान्तिपूर्ण आन्‍दोलन से इतनी बौखलाहट क्‍यों? आखिर मज़दूर माँग ही क्‍या रहे हैं? उनका मात्र इतना कहना है कि केजरीवाल ने मज़दूरों से जो वायदे किये थे, उन्‍हें पूरा करने के बारे में कुछ तो बोलें! वे तो सत्‍तासीन होने के बाद साँस-डकार ही नहीं ले रहे हैं।
मज़दूरों से किये गये एक भी वायदे की चर्चा भी नहीं की!
केजरीवाल ने पूरी दिल्‍ली से ठेका प्रथा को खत्‍म करने का वायदा किया था। अब उन्‍होंने इसकी तकनीकि जाँच के लिए एक समिति बना दी है, जिसकी कोई ज़रूरत नहीं थी। उन्‍हें करना सिर्फ इतना था कि सिर्फ एक दिन का विधान सभा सत्र बुलाकर इस आशय का विधेयक पारित करवा लेना था कि दिल्‍ली में कोई भी निजी या सरकारी नियोक्‍ता नियमित प्रकृति के काम के लिए ठेका मज़दूर नहीं रह सकता। इसके बजाये एक समिति बनाकर केजरीवाल ने मामले को टाल दिया है। समिति रिपोर्ट देगी और उसपर सरकार विचार करेगी, तबतक लोकसभा चुनावों की आचार संहिता लागू हो जायेगी।केजरीवाल ने कहा था कि निजी झुग्‍गीवासियों को पक्‍के मकान दिये जायेंगे और तबतक कोई झुग्‍गी उजाड़ी नहीं जायेगी। अब इस काम के लिए समय-सीमा बताना तो दूर, केजरीवाल कुछ बोल ही नहीं रहे हैं। यही नहीं, कांग्रेस सरकार के समय जिन झुग्‍गी बस्तियों का नियमतिकरण हुआ था, अब उनमें भ्रष्‍टाचार बताकर उस फैसले को पलटने की बात की जा रही है। यानी लाखों मज़दूरों को पुनर्वास की व्‍यवस्‍था के बिना उजाड़ने की भूमिका तैयार की जा रही है।केजरीवाल ने दिल्‍ली के सभी पटरी दुकानदारों और रेहड़ीवालों को लाइसेंस और स्‍थाई स्‍थान देने का वायदा किया था, उसके बारे में भी वे अब साँस-डकार नहीं ले रहे हैं।चुनाव प्रचार के दौरान मज़दूर बस्तियों में उनके उम्‍मीदवार सौ अतिरिक्‍त सरकारी स्‍कूल खोलने और वर्तमान स्‍कूलों के स्‍तर को ठीक करने का वायदा कर रहे थे। इस वायदें को भी ठण्‍डे बस्‍ते में डाल दिया गया।
केजरीवाल का भ्रष्‍टाचार-विरोध मज़दूरों के लिए नहीं है!
केजरीवाल की राजनीति की पूरी बुनियाद भ्रष्‍टाचार-विरोध पर टिकी है। फिलहाल हम इस बुनियादी प्रश्‍न पर नहीं जाते कि पूँजीवाद को पूरी तरह भ्रष्‍टाचार-मुक्‍त किया ही नहीं जा सकता, कि पूँजीवाद स्‍वयं में ही भ्रष्‍टाचार है और यह कि जनता को भ्रष्‍टाचार-मुक्‍त पूँजीवाद नहीं, बल्कि पूँजीवाद-मुक्‍त राज और समाज चाहिए। भष्‍टाचार कितनी अधिक धनराशि का है, इससे अधिक अहम बात यह है कि किस भ्रष्‍टाचार से व्‍यापक आम आबादी का जीना मुहाल है! दिल्‍ली की साठ लाख मज़दूर आबादी का जीना मुहाल करने वाला भ्रष्‍टाचार है — श्रम विभाग का भ्रष्‍टाचार। किसी भी फैक्‍ट्री या व्‍यावसायिक प्रतिष्‍ठान में मज़दूरों को न्‍यूनतम मज़दूरी नहीं मिलती, काम के तय घण्‍टों से अधिक काम करना पड़ता है, ओवरटाइम तय से आधी दर पर मिलता है, कैजुअल मज़दूरों का मस्‍टर रोल नहीं मिंटेन होना, सैलरी स्लिप नहीं मिलती, पी.एफ. इ.एस.आई. की सुविधा नहीं मिलती, फैक्‍ट्री इंस्‍पेक्‍टर, लेबर इंस्‍पेक्‍टर आदि दौरा नहीं करते, कारखाने स्‍वास्‍थ्‍य, सुरक्षा और पर्यावरण के निर्धारित मानकों का पालन नहीं करते! तात्‍पर्य यह कि किसी भी श्रम कानूनों का पालन नहीं होता। यदि केजरीवाल वास्‍तव में भ्रष्‍टाचार से आम लोगों को होने वाली परेशानी से परेशान हैं, तो सबसे पहले उन्‍हें श्रम विभाग के भ्रष्‍टाचार को दूर करना चाहिए। मज़दूरों की यही माँग है।लेकिन मज़दूरों के प्रति केजरीवाल की सरकार का रवैया क्‍या है? डी.टी.सी. के 20हजार ठेका कर्मचारियों और 10हजार अस्‍थाई शिक्षकों के धरने और अनशन को हवाई आश्‍वासन की आड़ में नौकरी छीन लेने और दमन की धमकी से समाप्‍त कर दिया गया। वजीरपुर कारखाना यूनियन के मज़दूर जब अपनी माँगों को लेकर सचिवालय पहुँचे तो बैरिकेडिंग करके पुलिस खड़ी करके उन्‍हें मंत्री से मिलने से रोक दिया गया और दफ्तर में केवल उनका माँगपत्रक रिसीव कर लिया गया। केजरीवाल का जनता दरबार तो हवा हो ही गया, अब उनके मंत्री जनता से मिलते तक नहीं।
‘आप’ के आम आदमी

ये ‘आप’ के आम आदमी हैं कौन? यूँ तो ऊपर भी विचित्र खिचड़ी है! केजरीवाल का एन.जी.ओ. गिरोह, किशन पटनायक धारा के समाजवादी योगेन्‍द्र यादव, राज नारायण धारा के समाजवादी आनंद कुमार, मंचीय नुक्‍कड़ कवि, घोर दखिणपंथी विचारों वाला कुमार विश्‍वास, ए.बी.वी.पी. से एन.एस.यू.आई. से भा.क.पा.(मा-ले) होते हुए यहाँ तक आये गोपाल राय तथा कमल मित्र शेनॉय, परिमल माया सुधाकर, बली सिंह चीमा, आतिशी मारलेना आदि-आदि भाँति-भाँति के, रंग-बिरंगे ”वामपंथियों” के साथ कैप्‍टन गोपी नाथ, नारायण मूर्ति और वी. बालाकृष्‍णन जैसे कारपोरेट शहंशाह…। ऐसी लोकरंजक राजनीतिक खिंचड़ी का असली रंग और स्‍वाद तो ग्रासरूट स्‍तर पर पता चलता है। केजरीवाल को मध्‍यवर्गीय इलाकों में आर.डब्‍ल्‍यू.ए. खुशहाल मध्‍य वर्गीय जमातों, कारोबारियों और आई.टी. – व्‍यापार प्रबंधन आदि पेशों में लगे उन युवाओं का समर्थन प्राप्‍त है, जो पारम्‍परिक तौर पर दक्षिणपंथी विचारों के और प्राय: भाजपा के वोट बैंक होते रहे हैं। लेकिन सबसे दिलचस्‍प दिल्‍ली की मज़दूर बस्तियों में देखने को मिलता है। वहाँ सारे छोटे कारखानेदारों, दुकानदारों, लेबर-कांट्रेक्‍टर के अतिरिक्‍त मज़दूरों को सूद पर पर पैसे देने वाले, कमेटी डालने वाले, मज़दूरों के रिहाइश वाले लॉजों-खोलियों और घरों के मालिक तथा प्रापर्टी डीलर और उनके चम्‍पुओं के गिरोह — यही आम आदमी की टोपी पहनकर मज़दूर बस्‍तियों में घूम रहे हैं। पिछले एक माह के अभियान के दौरान हमलोगों ने इस नंगी-कुरूप सच्‍चाई को बहुत गहराई से महसूस किया और झेला। सिर्फ एक उदाहरण ही काफी होगा। ‘बवाना चैम्‍बर ऑफ इण्‍डस्‍ट्रीज’ के चेयरमैन प्रकाशचंद जैन उत्‍तर-पश्चिमी दिल्‍ली में आम आदमी पार्टी के एक अग्रणी नेता हैं। इनके साथ और भी कई फैक्‍ट्री मालिक, प्रॉपर्टी डीलर और ठेकदार हैं। कोई प्रकाश चन्‍द जैन से ही पूछे क्‍या उनके कारखानों में मज़दूरों को न्‍यूनतम वेतन, पी.एफ., ई.एस.आई. आदि दिया जाता है, क्‍या वहाँ श्रम कानूनों का पालन होता है? कमोबेश यही स्थिति दिल्‍ली के सभी औद्योगिक इलाकों और मज़दूर बस्तियों की है। इसके बावजूद, एन.जी.ओ.-सुधारवादियों और भाँति-भाँति के सामाजिक जनवादियों को तो छोड़ ही दें, आम आदमी पार्टी की झोली में यूँ ही जा टपकने वाले भावुकतावादी कम्‍युनिस्‍टों को अभी भी केजरीवाल की राजनीति का असली रंग नहीं दिख रहा है, तो निश्‍चय ही राजनीतिक काला मोतिया के चपेट में वे अंधे हो चुके हैं। या हो सकता है, वे पहले से ही अंधे रहे हों।आम जनता स्‍वराज और सड़क से सत्‍ता चलाने की रट लगाने वाले लोकरंजकातावादी मदारी अब सरकारी धोखाधड़ी और धमकी, पुलिसिया धौंसपट्टी और पार्टी कार्यकर्ताओं की दादागीरी का खुलकर सहारा ले रहे हैं। मज़दूरों की वर्ग दृष्टि एकदम साफ है। वह केजरीवाल के लोकरंजकतावाद की असलियत को अभी से समझने लगा है। वह कुछ कुलीनतावादी दिवालिये किताबी वामपंथियों की तरह मतिभ्रम-संभ्रम-दिग्‍भ्रम का शिकार नहीं है।कल 6 दिसम्‍बर को सचिवालय पहुँचकर दिल्‍ली के मज़दूर केजरीवाल की दहलीज पर याददिहानी की पहली दस्‍तक देंगे। यह अंत नहीं, महज एक नयी शुरुआत है।जो भी साथी दिल्‍ली के मेहनतकशों की इस आवाज के साथ है, वे भी कल उनके समर्थन में ज़रूर पहुँचें। कल ग्‍यारह बजे हम सभी राजघाट पर एकत्र होंगे और वहाँ से सचिवालय की ओर मार्च करेंगे।
Mazdoor Bigul <bigulakhbar@gmail.com>

Thursday, February 28, 2013

पूर्वी भारत में हरित क्रांति की उल्‍लेखनीय सफलता

28-फरवरी-2013 13:42 IST
नई किस्मों की योजना को शुरू करने के लिए 200 करोड़ रुपये
वित्‍त मंत्री पी. चिदबंरम ने आज संसद में वर्ष 2013-14 का आम बजट पेश करते हुए बताया कि पूर्वी भारत में हरित क्रांति ने उल्लेखनीय सफलता प्राप्‍त की है। उन्होंने 2013-14 में पूर्वी भारतीय राज्‍यों की सहायता के लिए 1,000 करोड़ रुपये के आवंटन का प्रस्‍ताव किया है। फसलों के विविधिकरण के लिए किसानों को प्रोत्‍साहित करने के‍ लिए 500 करोड़ रुपये, राष्‍ट्रीय कृषि विकास योजना और राष्‍ट्रीय खाद्य सुरक्षा मिशन के लिए क्रमश: 9,954 करोड़ रुपये तथा 2,250 करोड़ रुपये प्रदान करने का भी उन्‍होंने प्रस्‍ताव किया है। 

उन्‍होंने समेकित जलसंभरण कार्यक्रम के लिए 2012-13 के बजट अनुमान की राशि 3,050 करोड़ रुपये को बढ़ाकर 5,387 करोड़ रुपये के आवंटन का भी प्रस्‍ताव किया है। उन्‍होंने सूक्ष्म–पोषक तत्‍वों से संपन्‍न फसल की नई किस्मों की योजना को शुरू करने के लिए 200 करोड़ रुपये का आवंटन किया है। वित्‍त मंत्री ने पौध संरक्षण मुद्दों के‍लिए राष्‍ट्रीय जैव दबाव प्रबंधन संस्‍थान रामपुर छ‍तीसगढ़ में तथा भारतीय कृषि‍जैव प्रौद्योगिकी संस्‍थान रांची झारखंड में स्‍थापित करने की भी घोषणा की है। केरल राज्‍य में नारियल के बागानों के पुन:रोपण तथा नवीकरण के लिए वर्ष 2013-14 में 75 करोड़ रुपये की अतिरिक्‍त राशि देने का भी प्रस्‍ताव किया है। (PIB)

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मीणा/राजगोपाल/प्रदीप/सुधीर/संजीव/इन्‍द्रपाल/बिष्‍ट/शदीद/सुनील/शौकत/मनोज-

Tuesday, February 26, 2013

नई पैसेंजर गाडियां

26-फरवरी-2013 15:58 IST
निम्नलिखित पैसेंजर गाडियों को शुरु करने का प्रस्ताव
रेल मंत्री श्री पवन कुमार बंसल ने संसद में 2013-14 का रेल बजट प्रस्तुत करते हुए निम्नलिखित पैसेंजर गाडियों को शुरु करने का प्रस्ताव किया-

1.      बठिंडा-धुरी पैसेंजर (दैनिक)

2.      बीकानेर-रतनगढ़ पैसेंजर (दैनिक)

3.      भावनगर-पलिटाना पैसेंजर (दैनिक)

4.      भावनगर-सुरेन्द्रनगर पैसेंजर (दैनिक)

5.      बरेली-लालकुआं पैसेंजर (दैनिक)

6.      छपरा-थावे पैसेंजर (दैनिक)

7.      लोहारू-सीकर पैसेंजर (दैनिक) आमान परिवर्तन के बाद

8.      मडगांव-रत्नागिरी पैसेंजर (दैनिक)

9.      मारिकुप्पम-सीतामढ़ी पैसेंजर (दैनिक)

10.  मुजफ्फरपुर-सीतामढ़ी पैसेंजर (दैनिक) वाया रुनिसैदपरुर

11.  नादियाड-मोडासा पैसेंजर (सप्ताह में 6 दिन)

12.  नांदयाल-कुर्नूल टाऊन पैसेंजर (सप्ताह में 6 दिन)

13.  न्यू अमरावती-नारखेड़ पैसेंजर (दैनिक)

14.  पुनलूर-कोल्लम पैसेंजर (दैनिक)

15.  पूर्णा-परली वैजनाथ पैसेंजर (दैनिक)

16.  पलानी-तिरुचंदरू पैसेंजर (दैनिक)

17.  रतनगढ़-सरदारशहर पैसेंजर (दैनिक) आमान परिवर्तन के बाद

18.  समस्तीपुर-बनमंखी पैसेंजर वाया सहरसा, मधेपुरा (दैनिक) आमान परिवर्तन के बाद

19.  शोरानूर-कोजीकोडे पैसेंजर (दैनिक)

20.  सुरेन्द्रनगर-ध्रांगध्रा पैसेंजर (दैनिक)

21.  सूरतगढ़-अनूपगढ़ पैसेंजर (दैनिक)

22.  सोमनाथ-राजकोट पैसेंजर (दैनिक)

23.  सीतामढ़ी-रक्सौल पैसेंजर (दैनिक)

24.  श्रीगंगानगर-हनुमानगढ़-सादुलपुर पैसेंजर (दैनिक) आमान परिवर्तन के बाद

25.  तालगुप्पा-शिमोगा टाऊन पैसेंजर (दैनिक)

26.  त्रिशूर-गुरूवायुर पैसेंजर (दैनिक)

                                                                                                     (PIB)
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वि. कासोटिया/अल्केश/प्रदीप/प्रियंका/विजयलक्ष्मी/अंबुज/तारा/सोनिका/सुनील


Thursday, February 7, 2013

आम जनता से कंपनी के बारे में जानकारी आमंत्रित

06-फरवरी-2013 19:08 IST
वॉल-मार्ट जांच समिति ने लोगों से सूचनाएं मांगी 
सरकार द्वारा गठित वॉल-मार्ट जांच समिति ने आम जनता से कंपनी के बारे में जानकारी आमंत्रित की है। याद रहे कि वॉल-मार्ट कंपनी ने अमेरिका की सीनेट में ये खुलासा किया था कि उसने भारत में अपनी पैठ जमाने के लिए वर्ष 2008 से लगभग 125 करोड रुपये लॉबिंग में खर्च किए। इसके बाद सरकार ने संसद में ये आश्‍वासन दिया था कि एक अवकाश प्राप्‍त न्‍यायाधीश की जांच समिति द्वारा इस प्रकरण की जांच कराई जाएगी। समिति को 3 महीने में अपनी रिपोर्ट दे देनी है। 

अब सरकार ने आम जनता से जानकारी और दस्‍तावेजों को आमंत्रित किया है, जिन्‍हें 15 दिन के अंदर संयोजक, वॉल-मार्ट जांच समिति, कमरा नम्‍बर 208, विज्ञान भवन सौध, मौलाना आजाद रोड, नई दिल्‍ली-110011 को भेजा जा सकता है। इसके अलावा संबंधित जानकारी wmcommitte-mca@nic.in पर भी दी जा सकती है। (PIB)

वि.कासोटिया/अरूण/मलिक-466

Monday, December 24, 2012

श्रमिक कानूनों में सुधार पर संसदीय समिति की बैठक

24-दिसंबर-2012 15:36 IST
साथ-साथ बाल श्रम कानूनों का मामला भी जोर से उठाया  
श्रमिक कानूनों में व्‍यापक संशोधनों के लिए संसदीय सलाहकार समिति के सदस्‍यों ने सरकार से जोर देकर कहा है कि शिकायतों को समय पर दूर करने के साथ श्रमिक कानूनों को तेसी से और कारगर ढ़ग से लागू किया जाए। समिति की कल हुई बैठक में सदस्‍यों ने ठेका श्रमिक कानून में सुधार के साथ-साथ बाल श्रम कानूनों का मामला उठाया। केंद्रीय श्रम एवं रोजगार मंत्री श्री मल्लिकार्जुन खड्गे ने इस बैठक की अध्‍यक्षता की इन मामलों पर गंभीरता से विचार करने का आश्‍वासन दिलाया। 

श्री खड्गे ने कहा कि श्रम का विषय समवर्ती सूचि में शामिल है और केन्‍द्र और राज्‍य सरकार दोनों को इस संबंध में कानून बनाने का अधिकार है। उन्‍होंने सदस्‍यों को बताया कि पिछले कुछ वर्षों के दौरान पारिश्रमिक भुगतान अधिनियम-1936 में संशोधन किए गए है, जिनके परिणामस्‍वरूप पारिश्रमिक का भुगतान 1100 रूपये मासिक से बढ़ाकर पहले 6500 समय प्रतिमाह और बाद में 10,000 रूपये मासिक कर दिया गया। 

इसके अलावा अन्‍य पिछड़ें वर्गों को आरक्षण उपलब्‍ध कराने के उद्देश्‍य से अप्रिंटिसेज अधिनियम-1961 में संशोधन किया गया है। यही नहीं बल्कि मातृत्‍व लाभ अधिनियम-1961 में भी संशोधन करके चिकित्‍सा बोनस की राशि 250 रूपये से बढ़ाकर 1000 रूपये कर दी गयी है। गजट अधिसूचना के माध्‍यम से इस राशि को 20000 रूपये तक करने के लिए केंद्रीय सरकार को अधिकृत किया गया है। इसके साथ ही श्रमिक मुआवजा कानून में भी संशोधन करके इसमें स्‍त्री-पुरूष के लिंग भेद को खत्‍म दिया गया हे। अब इस कानून के कर्मी मुआवजा कानून -1923 का शीर्षक दिया गया है। 

श्री खड्गे ने यह भी बताया कि उनके मंत्रालय ने श्रमिक राज्‍य बीमा कानून- 1948 में संशोधन करके इस योजना के अंतर्गत उपलबध कराए गए लाभों के स्‍तर में सुधार के साथ असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों को स्‍वास्‍थ्‍य देखभाल की सुविधा उपलब्‍ध कराये जाने के उद्देश्‍य से कर्मचारी राज्‍य बीमा संस्‍थान की ढांचागत सुविधाओं को सशक्‍त बनाया है। इसके साथ ही ग्रैच्‍युटी भुगतान अधिनियम-1972 में भी संशोधन करके ग्रैच्‍युटी भुगतान की राशि 3.5 लाख रूपये से बढ़ाकर 10 लाख रूपये कर दी गई है और अब इसमें शैक्षिक संस्‍थानों के अध्‍यापकों को भी शामिल किया गया है। 
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वि.कासोटिया/शिराजी/सुमन-6321

Wednesday, November 21, 2012

कुपोषण के आंकड़े सतर्क करने वाले: राष्‍ट्रपति

राष्‍ट्रपति ने की कुपोषण के खिलाफ अभियान की शुरूआत 
कुपोषण के खिलाफ लड़ाई प्रत्‍येक परिवार और व्‍यक्ति तक पहुंचे: श्रीम‍ती कृष्‍णा तीरथ ने मीडिया से की खासतौर से अपील 
राष्‍ट्रपति श्री प्रणब मुखर्जी ने कल कुपोषण के खिलाफ राष्‍ट्रव्‍यापी आईईसी अभियान की शुरूआत की। महिला और बाल विकास मंत्रालय ने कुपोषण के खिलाफ अभियान चलाने की पहल की है। 

इस अवसर पर महिला और बाल विकास मंत्री श्रीमती कृष्‍णा तीरथ के अलावा मानव संसाधन विकास मंत्री श्री एम.एम. पल्‍लम राजू, संयुक्‍त राष्‍ट्र की अनेक एजेंसियों के प्रतिनिधि, अभिनेता श्री आमिर खान, गीतकार और पटकथा लेखक श्री प्रसून जोशी, सिविल सोसायटी के सदस्‍य और अनेक कार्यकर्ता मौजूद थे। 

कुपोषण के आंकड़ो को चिंता का विषय बताते हुए राष्‍ट्रपति ने कहा कि हमें ऐसे समय पर अधिकतम प्रयास करने चाहिए जब भारतीय अर्थव्‍यवस्‍था मजबूत सकारात्‍मक विकास के पथ पर है। ये आंकड़े सतर्क करने वाले हैं और इस बात के महत्‍व को दर्शाते है कि कुपोषण के खिलाफ संगठित अभियान चलाने की जरूरत है। उन्‍होंने कहा कि जब तक हम अपने बच्‍चों और उनकी माताओं के लिए अच्‍छा पोषण और स्‍वास्‍थ्‍य सुनिश्चित नहीं करेंगे तब तक हम निरंतर और समग्र विकास के लक्ष्‍य को हासिल नहीं कर सकते। हमें कुपोषण रोकने को सर्वोच्‍च प्राथमिकता देनी होगी।

राष्‍ट्रपति ने कहा कि इस अभियान को सफल बनाने के लिए कुपोषण के विभिन्‍न पहलुओं के बारे में लोगों में जागरूकता को बढ़ाना होगा और विभिन्‍न कार्यक्रमों के बारे में अलग से जागरूकता फैलानी होगी। उन्‍होंने उम्‍मीद जाहिर की कि इस अभियान से परिवारों, समुदायों और अन्‍य साझीदारों को न केवल कुपोषण को समझने में मदद मिलेगी बल्कि वे बेहतर जानकारी के साथ मिलकर कार्य भी कर सकेंगे। 

महिला और बाल विकास मंत्री श्रीम‍ती कृष्‍णा तीरथ ने कहा कि इस अभियान से समाज में महिलओं और बच्‍चों में अधिक संवेदनशीलता और व्‍यवहारिक बदलाव आयेगा। जिससे लोग अपनी जिम्‍मेदारियों को समझते हुए अपनी जिम्‍मेदारियों का निर्वहन कर सकेंगे। उन्‍होंने इच्‍छा जाहिर की कि कुपोषण के खिलाफ संघर्ष प्रत्‍येक आंगनवाड़ी केंद्र से लेकर प्रत्‍येक परिवार और प्रत्‍येक व्‍यक्ति तक पहुंचे। उन्‍होंने विश्‍वास व्‍यक्‍त किया कि जागरूकता अभियान में नीति में बदलाव पर जोर दिया जायेगा और इससे बच्‍चों, किशोरों, गर्भवती और स्‍तनपान कराने वाली माताओं में कुपोषण को रोकने और उसे खत्‍म करने में मदद मिलेगी। उन्‍होंने मीडिया से खासतौर से अपील की कि वे इस अभियान को आम आदमी तक पहुंचाने में सक्रिय भूमिका निभाये। 

इस अभियान की शुरूआत पर श्री आमिर खान ने इसे जानकारी हासिल करने वाला अनुभव बताया। उन्‍होंने जोर देकर कहा कि ‘’अगर हमारे बच्‍चे स्‍वस्‍थ नहीं होंगे तो हम विकास के पथ पर आगे नहीं बढ़ पायेंगे’’। उन्‍होंने कहा कि आज यह जरूरी है कि देश कुपोषण से मुकाबला करे। उन्‍होंने आशा व्‍यक्‍त की कि यह अभियान इतनी जागरूकता पैदा कर देगा कि भारत कुपोषण से मुक्‍त हो जायेगा।

श्री आमिर खान लोगों से जुड़ेंगे और कुपोषण के प्रभाव और इसे रोकने तथा कम करने के आसान तरीकों के बारे में जागरूकता फैलायेंगे। शिशुओं और छोटे बच्‍चों के खान-पान और उनकी देखभाल के बारे में 18 विभिन्‍न भारतीय भाषाओं में टेलीविजन रेडियो और प्रिंट मीडिया पर विज्ञापन के रूप में संदेश दिये जायेगे। 

श्री प्रसून जोशी ने कहा कि इस अवधारणा को शुरू करना काफी कठिन था क्‍योंकि यह एक जटिल समस्‍या है जिसके बारे में आसान कदम उठाकर प्रचार करने की जरूरत है। 

यूनीसेफ के कंट्री हैड श्री लुई जोर्ज आर्सनॉल्‍ट ने यूनीसेफ की लम्‍बी भागीदारी की चर्चा की और सरकार के साथ मिलकर काम करने की प्रतिबद्धता जाहिर की। उन्‍होंने कुपोषण से निपटने में सरकार के प्रयासों की सराहना की। (PIB)
 20-नवंबर-2012 12:08 IST

मीणा/कविता/सुमन – 5401