01-मार्च-2013 15:53 IST
रिक्शा, ऑटो रिक्शा, टैक्सी चालक, सफाई कर्मी, कूड़ा बीनने वाले और खनन मजदूर योजना में शामिल अगले वित्त वर्ष 2013-14 के बजट प्रस्तावों में रिक्शा, ऑटो रिक्शा और टैक्सी चालकों सफाई कर्मियों, कूड़ा बीनने वालों और खनन मजदूरों को राष्ट्रीय स्वास्थ्य बीमा योजना के दायरे में शामिल करने का प्रस्ताव है। यह घोषणा वित्त मंत्री पी. चिदम्बरम ने कल लोकसभा में 2013-14 का आम बजट पेश करते हुए की।
श्री चिदम्बरम ने कहा कि असंगठित क्षेत्र के लिए एक व्यापक और समन्वित सामाजिक सुरक्षा पैकेज से समाज के सबसे गरीब और कमजोर वर्गों को लाभ होगा। इस पैकेज में विकलांगों की सहायता, स्वास्थ्य सेवाएं, माताओं और शिशुओं के लिए सहायता और पेंशन के लाभ शामिल किए जाने चाहिएं। उन्होंने कहा कि विभिन्न मंत्रालय और विभाग इस समय आम आदमी बीमा योजना, जननी सुरक्षा बीमा योजना, राष्ट्रीय स्वास्थ्य बीमा योजना, जननी सुरक्षा योजना और इंदिरा गांधी मातृत्व सहयोग योजना चला रहे हैं। वित्त मंत्री ने विभिन्न मंत्रालयों और विभागों के बीच समन्वय की आवश्यकता पर जोर दिया, ताकि एक व्यापक सामाजिक सुरक्षा पैकेज तैयार किया जा सके।
राष्ट्रीय स्वास्थ्य बीमा योजना, श्रम और रोजगार मंत्रालय की प्रायोगिक योजना है, जिसका इस समय गरीबी की रेखा से नीचे के 3 करोड़ 40 लाख परिवार लाभ उठा रहे हैं। (PIB)
मीणा/राजगोपाल/चन्द्रकला-765
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Friday, March 1, 2013
Thursday, February 7, 2013
आम जनता से कंपनी के बारे में जानकारी आमंत्रित
06-फरवरी-2013 19:08 IST
वॉल-मार्ट जांच समिति ने लोगों से सूचनाएं मांगी
सरकार द्वारा गठित वॉल-मार्ट जांच समिति ने आम जनता से कंपनी के बारे में जानकारी आमंत्रित की है। याद रहे कि वॉल-मार्ट कंपनी ने अमेरिका की सीनेट में ये खुलासा किया था कि उसने भारत में अपनी पैठ जमाने के लिए वर्ष 2008 से लगभग 125 करोड रुपये लॉबिंग में खर्च किए। इसके बाद सरकार ने संसद में ये आश्वासन दिया था कि एक अवकाश प्राप्त न्यायाधीश की जांच समिति द्वारा इस प्रकरण की जांच कराई जाएगी। समिति को 3 महीने में अपनी रिपोर्ट दे देनी है।
अब सरकार ने आम जनता से जानकारी और दस्तावेजों को आमंत्रित किया है, जिन्हें 15 दिन के अंदर संयोजक, वॉल-मार्ट जांच समिति, कमरा नम्बर 208, विज्ञान भवन सौध, मौलाना आजाद रोड, नई दिल्ली-110011 को भेजा जा सकता है। इसके अलावा संबंधित जानकारी wmcommitte-mca@nic.in पर भी दी जा सकती है। (PIB)
वि.कासोटिया/अरूण/मलिक-466
वॉल-मार्ट जांच समिति ने लोगों से सूचनाएं मांगी
सरकार द्वारा गठित वॉल-मार्ट जांच समिति ने आम जनता से कंपनी के बारे में जानकारी आमंत्रित की है। याद रहे कि वॉल-मार्ट कंपनी ने अमेरिका की सीनेट में ये खुलासा किया था कि उसने भारत में अपनी पैठ जमाने के लिए वर्ष 2008 से लगभग 125 करोड रुपये लॉबिंग में खर्च किए। इसके बाद सरकार ने संसद में ये आश्वासन दिया था कि एक अवकाश प्राप्त न्यायाधीश की जांच समिति द्वारा इस प्रकरण की जांच कराई जाएगी। समिति को 3 महीने में अपनी रिपोर्ट दे देनी है।
अब सरकार ने आम जनता से जानकारी और दस्तावेजों को आमंत्रित किया है, जिन्हें 15 दिन के अंदर संयोजक, वॉल-मार्ट जांच समिति, कमरा नम्बर 208, विज्ञान भवन सौध, मौलाना आजाद रोड, नई दिल्ली-110011 को भेजा जा सकता है। इसके अलावा संबंधित जानकारी wmcommitte-mca@nic.in पर भी दी जा सकती है। (PIB)
वि.कासोटिया/अरूण/मलिक-466
Monday, December 24, 2012
श्रमिक कानूनों में सुधार पर संसदीय समिति की बैठक
24-दिसंबर-2012 15:36 IST
साथ-साथ बाल श्रम कानूनों का मामला भी जोर से उठाया
श्रमिक कानूनों में व्यापक संशोधनों के लिए संसदीय सलाहकार समिति के सदस्यों ने सरकार से जोर देकर कहा है कि शिकायतों को समय पर दूर करने के साथ श्रमिक कानूनों को तेसी से और कारगर ढ़ग से लागू किया जाए। समिति की कल हुई बैठक में सदस्यों ने ठेका श्रमिक कानून में सुधार के साथ-साथ बाल श्रम कानूनों का मामला उठाया। केंद्रीय श्रम एवं रोजगार मंत्री श्री मल्लिकार्जुन खड्गे ने इस बैठक की अध्यक्षता की इन मामलों पर गंभीरता से विचार करने का आश्वासन दिलाया।
श्री खड्गे ने कहा कि श्रम का विषय समवर्ती सूचि में शामिल है और केन्द्र और राज्य सरकार दोनों को इस संबंध में कानून बनाने का अधिकार है। उन्होंने सदस्यों को बताया कि पिछले कुछ वर्षों के दौरान पारिश्रमिक भुगतान अधिनियम-1936 में संशोधन किए गए है, जिनके परिणामस्वरूप पारिश्रमिक का भुगतान 1100 रूपये मासिक से बढ़ाकर पहले 6500 समय प्रतिमाह और बाद में 10,000 रूपये मासिक कर दिया गया।
इसके अलावा अन्य पिछड़ें वर्गों को आरक्षण उपलब्ध कराने के उद्देश्य से अप्रिंटिसेज अधिनियम-1961 में संशोधन किया गया है। यही नहीं बल्कि मातृत्व लाभ अधिनियम-1961 में भी संशोधन करके चिकित्सा बोनस की राशि 250 रूपये से बढ़ाकर 1000 रूपये कर दी गयी है। गजट अधिसूचना के माध्यम से इस राशि को 20000 रूपये तक करने के लिए केंद्रीय सरकार को अधिकृत किया गया है। इसके साथ ही श्रमिक मुआवजा कानून में भी संशोधन करके इसमें स्त्री-पुरूष के लिंग भेद को खत्म दिया गया हे। अब इस कानून के कर्मी मुआवजा कानून -1923 का शीर्षक दिया गया है।
श्री खड्गे ने यह भी बताया कि उनके मंत्रालय ने श्रमिक राज्य बीमा कानून- 1948 में संशोधन करके इस योजना के अंतर्गत उपलबध कराए गए लाभों के स्तर में सुधार के साथ असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों को स्वास्थ्य देखभाल की सुविधा उपलब्ध कराये जाने के उद्देश्य से कर्मचारी राज्य बीमा संस्थान की ढांचागत सुविधाओं को सशक्त बनाया है। इसके साथ ही ग्रैच्युटी भुगतान अधिनियम-1972 में भी संशोधन करके ग्रैच्युटी भुगतान की राशि 3.5 लाख रूपये से बढ़ाकर 10 लाख रूपये कर दी गई है और अब इसमें शैक्षिक संस्थानों के अध्यापकों को भी शामिल किया गया है। ***
वि.कासोटिया/शिराजी/सुमन-6321
साथ-साथ बाल श्रम कानूनों का मामला भी जोर से उठाया
श्रमिक कानूनों में व्यापक संशोधनों के लिए संसदीय सलाहकार समिति के सदस्यों ने सरकार से जोर देकर कहा है कि शिकायतों को समय पर दूर करने के साथ श्रमिक कानूनों को तेसी से और कारगर ढ़ग से लागू किया जाए। समिति की कल हुई बैठक में सदस्यों ने ठेका श्रमिक कानून में सुधार के साथ-साथ बाल श्रम कानूनों का मामला उठाया। केंद्रीय श्रम एवं रोजगार मंत्री श्री मल्लिकार्जुन खड्गे ने इस बैठक की अध्यक्षता की इन मामलों पर गंभीरता से विचार करने का आश्वासन दिलाया।
श्री खड्गे ने कहा कि श्रम का विषय समवर्ती सूचि में शामिल है और केन्द्र और राज्य सरकार दोनों को इस संबंध में कानून बनाने का अधिकार है। उन्होंने सदस्यों को बताया कि पिछले कुछ वर्षों के दौरान पारिश्रमिक भुगतान अधिनियम-1936 में संशोधन किए गए है, जिनके परिणामस्वरूप पारिश्रमिक का भुगतान 1100 रूपये मासिक से बढ़ाकर पहले 6500 समय प्रतिमाह और बाद में 10,000 रूपये मासिक कर दिया गया।
इसके अलावा अन्य पिछड़ें वर्गों को आरक्षण उपलब्ध कराने के उद्देश्य से अप्रिंटिसेज अधिनियम-1961 में संशोधन किया गया है। यही नहीं बल्कि मातृत्व लाभ अधिनियम-1961 में भी संशोधन करके चिकित्सा बोनस की राशि 250 रूपये से बढ़ाकर 1000 रूपये कर दी गयी है। गजट अधिसूचना के माध्यम से इस राशि को 20000 रूपये तक करने के लिए केंद्रीय सरकार को अधिकृत किया गया है। इसके साथ ही श्रमिक मुआवजा कानून में भी संशोधन करके इसमें स्त्री-पुरूष के लिंग भेद को खत्म दिया गया हे। अब इस कानून के कर्मी मुआवजा कानून -1923 का शीर्षक दिया गया है।
श्री खड्गे ने यह भी बताया कि उनके मंत्रालय ने श्रमिक राज्य बीमा कानून- 1948 में संशोधन करके इस योजना के अंतर्गत उपलबध कराए गए लाभों के स्तर में सुधार के साथ असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों को स्वास्थ्य देखभाल की सुविधा उपलब्ध कराये जाने के उद्देश्य से कर्मचारी राज्य बीमा संस्थान की ढांचागत सुविधाओं को सशक्त बनाया है। इसके साथ ही ग्रैच्युटी भुगतान अधिनियम-1972 में भी संशोधन करके ग्रैच्युटी भुगतान की राशि 3.5 लाख रूपये से बढ़ाकर 10 लाख रूपये कर दी गई है और अब इसमें शैक्षिक संस्थानों के अध्यापकों को भी शामिल किया गया है। ***
वि.कासोटिया/शिराजी/सुमन-6321
Wednesday, November 21, 2012
कुपोषण के आंकड़े सतर्क करने वाले: राष्ट्रपति
राष्ट्रपति ने की कुपोषण के खिलाफ अभियान की शुरूआत
कुपोषण के खिलाफ लड़ाई प्रत्येक परिवार और व्यक्ति तक पहुंचे: श्रीमती कृष्णा तीरथ ने मीडिया से की खासतौर से अपील
राष्ट्रपति श्री प्रणब मुखर्जी ने कल कुपोषण के खिलाफ राष्ट्रव्यापी आईईसी अभियान की शुरूआत की। महिला और बाल विकास मंत्रालय ने कुपोषण के खिलाफ अभियान चलाने की पहल की है।
इस अवसर पर महिला और बाल विकास मंत्री श्रीमती कृष्णा तीरथ के अलावा मानव संसाधन विकास मंत्री श्री एम.एम. पल्लम राजू, संयुक्त राष्ट्र की अनेक एजेंसियों के प्रतिनिधि, अभिनेता श्री आमिर खान, गीतकार और पटकथा लेखक श्री प्रसून जोशी, सिविल सोसायटी के सदस्य और अनेक कार्यकर्ता मौजूद थे।
कुपोषण के आंकड़ो को चिंता का विषय बताते हुए राष्ट्रपति ने कहा कि हमें ऐसे समय पर अधिकतम प्रयास करने चाहिए जब भारतीय अर्थव्यवस्था मजबूत सकारात्मक विकास के पथ पर है। ये आंकड़े सतर्क करने वाले हैं और इस बात के महत्व को दर्शाते है कि कुपोषण के खिलाफ संगठित अभियान चलाने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि जब तक हम अपने बच्चों और उनकी माताओं के लिए अच्छा पोषण और स्वास्थ्य सुनिश्चित नहीं करेंगे तब तक हम निरंतर और समग्र विकास के लक्ष्य को हासिल नहीं कर सकते। हमें कुपोषण रोकने को सर्वोच्च प्राथमिकता देनी होगी।
राष्ट्रपति ने कहा कि इस अभियान को सफल बनाने के लिए कुपोषण के विभिन्न पहलुओं के बारे में लोगों में जागरूकता को बढ़ाना होगा और विभिन्न कार्यक्रमों के बारे में अलग से जागरूकता फैलानी होगी। उन्होंने उम्मीद जाहिर की कि इस अभियान से परिवारों, समुदायों और अन्य साझीदारों को न केवल कुपोषण को समझने में मदद मिलेगी बल्कि वे बेहतर जानकारी के साथ मिलकर कार्य भी कर सकेंगे।
महिला और बाल विकास मंत्री श्रीमती कृष्णा तीरथ ने कहा कि इस अभियान से समाज में महिलओं और बच्चों में अधिक संवेदनशीलता और व्यवहारिक बदलाव आयेगा। जिससे लोग अपनी जिम्मेदारियों को समझते हुए अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन कर सकेंगे। उन्होंने इच्छा जाहिर की कि कुपोषण के खिलाफ संघर्ष प्रत्येक आंगनवाड़ी केंद्र से लेकर प्रत्येक परिवार और प्रत्येक व्यक्ति तक पहुंचे। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि जागरूकता अभियान में नीति में बदलाव पर जोर दिया जायेगा और इससे बच्चों, किशोरों, गर्भवती और स्तनपान कराने वाली माताओं में कुपोषण को रोकने और उसे खत्म करने में मदद मिलेगी। उन्होंने मीडिया से खासतौर से अपील की कि वे इस अभियान को आम आदमी तक पहुंचाने में सक्रिय भूमिका निभाये।
इस अभियान की शुरूआत पर श्री आमिर खान ने इसे जानकारी हासिल करने वाला अनुभव बताया। उन्होंने जोर देकर कहा कि ‘’अगर हमारे बच्चे स्वस्थ नहीं होंगे तो हम विकास के पथ पर आगे नहीं बढ़ पायेंगे’’। उन्होंने कहा कि आज यह जरूरी है कि देश कुपोषण से मुकाबला करे। उन्होंने आशा व्यक्त की कि यह अभियान इतनी जागरूकता पैदा कर देगा कि भारत कुपोषण से मुक्त हो जायेगा।
श्री आमिर खान लोगों से जुड़ेंगे और कुपोषण के प्रभाव और इसे रोकने तथा कम करने के आसान तरीकों के बारे में जागरूकता फैलायेंगे। शिशुओं और छोटे बच्चों के खान-पान और उनकी देखभाल के बारे में 18 विभिन्न भारतीय भाषाओं में टेलीविजन रेडियो और प्रिंट मीडिया पर विज्ञापन के रूप में संदेश दिये जायेगे।
श्री प्रसून जोशी ने कहा कि इस अवधारणा को शुरू करना काफी कठिन था क्योंकि यह एक जटिल समस्या है जिसके बारे में आसान कदम उठाकर प्रचार करने की जरूरत है।
यूनीसेफ के कंट्री हैड श्री लुई जोर्ज आर्सनॉल्ट ने यूनीसेफ की लम्बी भागीदारी की चर्चा की और सरकार के साथ मिलकर काम करने की प्रतिबद्धता जाहिर की। उन्होंने कुपोषण से निपटने में सरकार के प्रयासों की सराहना की। (PIB) 20-नवंबर-2012 12:08 IST
मीणा/कविता/सुमन – 5401
कुपोषण के खिलाफ लड़ाई प्रत्येक परिवार और व्यक्ति तक पहुंचे: श्रीमती कृष्णा तीरथ ने मीडिया से की खासतौर से अपील
राष्ट्रपति श्री प्रणब मुखर्जी ने कल कुपोषण के खिलाफ राष्ट्रव्यापी आईईसी अभियान की शुरूआत की। महिला और बाल विकास मंत्रालय ने कुपोषण के खिलाफ अभियान चलाने की पहल की है।
इस अवसर पर महिला और बाल विकास मंत्री श्रीमती कृष्णा तीरथ के अलावा मानव संसाधन विकास मंत्री श्री एम.एम. पल्लम राजू, संयुक्त राष्ट्र की अनेक एजेंसियों के प्रतिनिधि, अभिनेता श्री आमिर खान, गीतकार और पटकथा लेखक श्री प्रसून जोशी, सिविल सोसायटी के सदस्य और अनेक कार्यकर्ता मौजूद थे।
कुपोषण के आंकड़ो को चिंता का विषय बताते हुए राष्ट्रपति ने कहा कि हमें ऐसे समय पर अधिकतम प्रयास करने चाहिए जब भारतीय अर्थव्यवस्था मजबूत सकारात्मक विकास के पथ पर है। ये आंकड़े सतर्क करने वाले हैं और इस बात के महत्व को दर्शाते है कि कुपोषण के खिलाफ संगठित अभियान चलाने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि जब तक हम अपने बच्चों और उनकी माताओं के लिए अच्छा पोषण और स्वास्थ्य सुनिश्चित नहीं करेंगे तब तक हम निरंतर और समग्र विकास के लक्ष्य को हासिल नहीं कर सकते। हमें कुपोषण रोकने को सर्वोच्च प्राथमिकता देनी होगी।
राष्ट्रपति ने कहा कि इस अभियान को सफल बनाने के लिए कुपोषण के विभिन्न पहलुओं के बारे में लोगों में जागरूकता को बढ़ाना होगा और विभिन्न कार्यक्रमों के बारे में अलग से जागरूकता फैलानी होगी। उन्होंने उम्मीद जाहिर की कि इस अभियान से परिवारों, समुदायों और अन्य साझीदारों को न केवल कुपोषण को समझने में मदद मिलेगी बल्कि वे बेहतर जानकारी के साथ मिलकर कार्य भी कर सकेंगे।
महिला और बाल विकास मंत्री श्रीमती कृष्णा तीरथ ने कहा कि इस अभियान से समाज में महिलओं और बच्चों में अधिक संवेदनशीलता और व्यवहारिक बदलाव आयेगा। जिससे लोग अपनी जिम्मेदारियों को समझते हुए अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन कर सकेंगे। उन्होंने इच्छा जाहिर की कि कुपोषण के खिलाफ संघर्ष प्रत्येक आंगनवाड़ी केंद्र से लेकर प्रत्येक परिवार और प्रत्येक व्यक्ति तक पहुंचे। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि जागरूकता अभियान में नीति में बदलाव पर जोर दिया जायेगा और इससे बच्चों, किशोरों, गर्भवती और स्तनपान कराने वाली माताओं में कुपोषण को रोकने और उसे खत्म करने में मदद मिलेगी। उन्होंने मीडिया से खासतौर से अपील की कि वे इस अभियान को आम आदमी तक पहुंचाने में सक्रिय भूमिका निभाये।
इस अभियान की शुरूआत पर श्री आमिर खान ने इसे जानकारी हासिल करने वाला अनुभव बताया। उन्होंने जोर देकर कहा कि ‘’अगर हमारे बच्चे स्वस्थ नहीं होंगे तो हम विकास के पथ पर आगे नहीं बढ़ पायेंगे’’। उन्होंने कहा कि आज यह जरूरी है कि देश कुपोषण से मुकाबला करे। उन्होंने आशा व्यक्त की कि यह अभियान इतनी जागरूकता पैदा कर देगा कि भारत कुपोषण से मुक्त हो जायेगा।
श्री आमिर खान लोगों से जुड़ेंगे और कुपोषण के प्रभाव और इसे रोकने तथा कम करने के आसान तरीकों के बारे में जागरूकता फैलायेंगे। शिशुओं और छोटे बच्चों के खान-पान और उनकी देखभाल के बारे में 18 विभिन्न भारतीय भाषाओं में टेलीविजन रेडियो और प्रिंट मीडिया पर विज्ञापन के रूप में संदेश दिये जायेगे।
श्री प्रसून जोशी ने कहा कि इस अवधारणा को शुरू करना काफी कठिन था क्योंकि यह एक जटिल समस्या है जिसके बारे में आसान कदम उठाकर प्रचार करने की जरूरत है।
यूनीसेफ के कंट्री हैड श्री लुई जोर्ज आर्सनॉल्ट ने यूनीसेफ की लम्बी भागीदारी की चर्चा की और सरकार के साथ मिलकर काम करने की प्रतिबद्धता जाहिर की। उन्होंने कुपोषण से निपटने में सरकार के प्रयासों की सराहना की। (PIB) 20-नवंबर-2012 12:08 IST
मीणा/कविता/सुमन – 5401
Sunday, October 14, 2012
लोकतंत्र के ड्रामे की एक और हकीकत बेनकाब
मज़दूरों को वोटर सूचियों में से बाहर रखने की साजिश का पर्दाफाश
लुधियाना: 14 अक्तूबर 2012 (लखविन्दर) पंजाब में वोटर कार्ड बनाऐ जा रहे हैं। इस बारे में जगह -जगह पर चुनाव कमीशन की तरफ से पोस्टर भी चिपकाए गए हैं। लोगों को दुनिया के सब से बड़े लोकतंत्र का हिस्सा बनने के लिए अपील की जा रही है। परन्तु ज़मीनी सच्चाई कुछ ओर ही है। लुधियाना के फोकल पुआइंट के गरीब लोग जो अपने वोटर कार्ड बनवाना चाहते हैं उनको बुरी तरह प्रेशान किया जा रहा है। राजीव गांधी कालोनी के हमारे दफ्तर में आज कुछ मज़दूर आए और उन्होंने बताया कि बिजली /पावरकोम दफ्तर में लोगों के फार्मों में नाजायज तौर पर गलतियाँ निकाल निकाल कर वापस भेजा जा रहा है और बहुत ही कम लोगों के फार्म स्वीकार किये जा रहे हैं। उन्होंने आगे शर्त रखी जा रही है कि जो कोई भी वोटर कार्ड बनवाना चाहता है वह अपने माता पिता के वोटर कार्ड की कापी भी फार्मों के साथ जमा करवाएँ। यह पूरी तरह गैरसविंधानक है। 18साल या इस से अधिक उम्र का कोई भी व्यक्ति जो इस देश का नागरिक है वोटर कार्ड बनवाने का हकदार है। संवैधानिक तौर पर ऐसी कोई शर्त नहीं है कि उसके माँ -बाप या गार्डीयन का वोटर कार्ड पहले बना होना चाहिए। कारख़ाना मज़दूर यूनियन की तरफ से मौके पर पहुँच कर जांच पड़ताल की गई। वहाँ जा कर देखा कि जो चार अधिकारी फार्म रिसीव करने के लिए बैठे हैं वह मज़दूरों के साथ ठीक ढंग साथ बात नहीं कर रहे। मज़दूरों साथ इस ढंग साथ बात की जा रही थी जैसे कि मज़दूर कोई अपराधी हो। उन को अनावश्यक गलतियाँ निकाल कर वापस भेजा जा रहा था। इस सारी हालत देख कर कारख़ाना मज़दूर यूनियन के साथियों ने वहाँ मौजूद लोगों विरोध करन का न्योता दिया और सभी ने मिल कर नारेबाज़ी की। हमने माँग की कि हमें शर्तों के विवरन दिए जाएँ जिन के आधार पर वोटर कार्ड बनाने के लिए फार्म स्वीकार किये जा रहे हैं। उन्होंने एक कागज़ दिया जिस पर कि सभी शर्तें लिखीं गई थीं। इस फार्म में माँ -बाप के वोटर कार्ड की कापी लगाने की कोई शर्त नहीं थी। इस पर उन्होंने आधिकारियों ने चयन कमीशन की तरफ से जारी एक सर्कुलर में से यह शर्त पढ़ कर सुनाई गई। इस की कापी पहले तो उन्होंने दी नहीं (कहा गया कि यह अंदरूनी सर्कुलर है) परन्तु लोगों के ज़ोरदार विरोध करन पर यह कापी हासिल कर ली गई।
कारख़ाना मज़दूर यूनियन का मानना है कि चयन कमीशन की तरफ से जारी किया गया यह सर्कुलर, लोगों के फार्मों में अनावश्यक गलतियाँ निकाल कर वापस भेजा जाना, लोगों साथ सीधे मुँह बात न किया जाना आदि सब एक साजिश के अंतर्गत हो रहा है। इस साजिश के अंतर्गत मंशा यह है कि कम से कम मज़दूरों के ही वोटर कार्ड बनने। इस का सबूत यह भी है कि वैसे तो चयन कमीशन की तरफ से फार्म जमा कराने का समय 1 अक्तूबर 2012 से लेकर 31 अक्तूबर 2012 तक का पूरे 31 दिन का समय रखा गया है परन्तु इस जगह पर इस समय दौरान केवल रविवार को ही फ़ार्म लिए जा राजे हैं अर्थात केवल चार दिन का अल्प समय ! हज़ारों मज़दूरों, जिन सभी की छुट्टी भी इतवार को नहीं होती बल्कि हफ्ते में अलग अलग दिन की छुट्टी होती है, के लिए चार इतवारों का समय रखा जाना यह दिखाता है कि मज़दूरों के वोटर कार्ड बनाने की वास्तव में मंशा ही नहीं है। इस साजिश पीछे कौन है यह ज़रूर सामने आना चाहिए।
हम यह मुद्दा कल को डी.सी. दफ्तर में लगाए जा रहे धरने दौरान ज़ोरदार ढंग साथ उठाएंगे। हमारी माँग है कि माँ -बाप के वोटर कार्ड की कापी साथ लगाए जाने की शर्त हटाई जाये, जो भी व्यक्ति उम्र और स्थान सम्बन्धित ज़रुरी दस्तावेज़ जमा करवाता है उस का वोटर कार्ड बनाया जाये, लोगों को अनावश्यक परेशान करना बंद किया जाये, फार्म जमा कराने की समय -सीमा एक महीना बढाई जाये और रोज़ाना की प्रात:काल 9 से 5 बजे तक फार्म स्वीकार किये जाएँ। गैरकानून्नी सर्कुलर के लिए जि़म्मेदार आधिकारियों को सस्पैंड किया जाये।
लखविन्दर कारख़ाना मज़दूर यूनियन के संचालक हैं !
लुधियाना: 14 अक्तूबर 2012 (लखविन्दर) पंजाब में वोटर कार्ड बनाऐ जा रहे हैं। इस बारे में जगह -जगह पर चुनाव कमीशन की तरफ से पोस्टर भी चिपकाए गए हैं। लोगों को दुनिया के सब से बड़े लोकतंत्र का हिस्सा बनने के लिए अपील की जा रही है। परन्तु ज़मीनी सच्चाई कुछ ओर ही है। लुधियाना के फोकल पुआइंट के गरीब लोग जो अपने वोटर कार्ड बनवाना चाहते हैं उनको बुरी तरह प्रेशान किया जा रहा है। राजीव गांधी कालोनी के हमारे दफ्तर में आज कुछ मज़दूर आए और उन्होंने बताया कि बिजली /पावरकोम दफ्तर में लोगों के फार्मों में नाजायज तौर पर गलतियाँ निकाल निकाल कर वापस भेजा जा रहा है और बहुत ही कम लोगों के फार्म स्वीकार किये जा रहे हैं। उन्होंने आगे शर्त रखी जा रही है कि जो कोई भी वोटर कार्ड बनवाना चाहता है वह अपने माता पिता के वोटर कार्ड की कापी भी फार्मों के साथ जमा करवाएँ। यह पूरी तरह गैरसविंधानक है। 18साल या इस से अधिक उम्र का कोई भी व्यक्ति जो इस देश का नागरिक है वोटर कार्ड बनवाने का हकदार है। संवैधानिक तौर पर ऐसी कोई शर्त नहीं है कि उसके माँ -बाप या गार्डीयन का वोटर कार्ड पहले बना होना चाहिए। कारख़ाना मज़दूर यूनियन की तरफ से मौके पर पहुँच कर जांच पड़ताल की गई। वहाँ जा कर देखा कि जो चार अधिकारी फार्म रिसीव करने के लिए बैठे हैं वह मज़दूरों के साथ ठीक ढंग साथ बात नहीं कर रहे। मज़दूरों साथ इस ढंग साथ बात की जा रही थी जैसे कि मज़दूर कोई अपराधी हो। उन को अनावश्यक गलतियाँ निकाल कर वापस भेजा जा रहा था। इस सारी हालत देख कर कारख़ाना मज़दूर यूनियन के साथियों ने वहाँ मौजूद लोगों विरोध करन का न्योता दिया और सभी ने मिल कर नारेबाज़ी की। हमने माँग की कि हमें शर्तों के विवरन दिए जाएँ जिन के आधार पर वोटर कार्ड बनाने के लिए फार्म स्वीकार किये जा रहे हैं। उन्होंने एक कागज़ दिया जिस पर कि सभी शर्तें लिखीं गई थीं। इस फार्म में माँ -बाप के वोटर कार्ड की कापी लगाने की कोई शर्त नहीं थी। इस पर उन्होंने आधिकारियों ने चयन कमीशन की तरफ से जारी एक सर्कुलर में से यह शर्त पढ़ कर सुनाई गई। इस की कापी पहले तो उन्होंने दी नहीं (कहा गया कि यह अंदरूनी सर्कुलर है) परन्तु लोगों के ज़ोरदार विरोध करन पर यह कापी हासिल कर ली गई।
कारख़ाना मज़दूर यूनियन का मानना है कि चयन कमीशन की तरफ से जारी किया गया यह सर्कुलर, लोगों के फार्मों में अनावश्यक गलतियाँ निकाल कर वापस भेजा जाना, लोगों साथ सीधे मुँह बात न किया जाना आदि सब एक साजिश के अंतर्गत हो रहा है। इस साजिश के अंतर्गत मंशा यह है कि कम से कम मज़दूरों के ही वोटर कार्ड बनने। इस का सबूत यह भी है कि वैसे तो चयन कमीशन की तरफ से फार्म जमा कराने का समय 1 अक्तूबर 2012 से लेकर 31 अक्तूबर 2012 तक का पूरे 31 दिन का समय रखा गया है परन्तु इस जगह पर इस समय दौरान केवल रविवार को ही फ़ार्म लिए जा राजे हैं अर्थात केवल चार दिन का अल्प समय ! हज़ारों मज़दूरों, जिन सभी की छुट्टी भी इतवार को नहीं होती बल्कि हफ्ते में अलग अलग दिन की छुट्टी होती है, के लिए चार इतवारों का समय रखा जाना यह दिखाता है कि मज़दूरों के वोटर कार्ड बनाने की वास्तव में मंशा ही नहीं है। इस साजिश पीछे कौन है यह ज़रूर सामने आना चाहिए।
हम यह मुद्दा कल को डी.सी. दफ्तर में लगाए जा रहे धरने दौरान ज़ोरदार ढंग साथ उठाएंगे। हमारी माँग है कि माँ -बाप के वोटर कार्ड की कापी साथ लगाए जाने की शर्त हटाई जाये, जो भी व्यक्ति उम्र और स्थान सम्बन्धित ज़रुरी दस्तावेज़ जमा करवाता है उस का वोटर कार्ड बनाया जाये, लोगों को अनावश्यक परेशान करना बंद किया जाये, फार्म जमा कराने की समय -सीमा एक महीना बढाई जाये और रोज़ाना की प्रात:काल 9 से 5 बजे तक फार्म स्वीकार किये जाएँ। गैरकानून्नी सर्कुलर के लिए जि़म्मेदार आधिकारियों को सस्पैंड किया जाये।
लखविन्दर कारख़ाना मज़दूर यूनियन के संचालक हैं !
Saturday, October 13, 2012
विकास के खोखले दावों की हकीकत अब आयेगी सडकों पर
पाँच हज़ार से अधिक लोगों के हस्ताक्षरों सहित सौपा जाएगा माँगपत्र

लुधियाना 12 अक्तूबर, 2012:(*विमला सक्करवाल)- लुधियाना के फोकल प्वाइंट फेज़-4 में स्थित मज़दूरों की बस्ती राजीव गांधी कालोनी के लोगों ने बुरी रिहायशी हालतों के प्रति प्रशासन की बेरुख़ी से तंग आकर संघर्ष का रास्ता पकडऩे का ऐलान कर दिया है। राजीव गांधी कालोनी के लोग गलियों पक्की कराने, सीवरेज निकासी के उचित प्रबंध, साफ़-सफ़ाई, साफ़ पानी की नियमित सप्लाई, बिजली सम्बन्धित शिकायतों के निपटारे के उचित प्रबंध समेत अनेकों माँगों के लिए 15 अक्तूबर (सोमवार) को कारख़ाना मज़दूर यूनियन के नेतृत्व में डी.सी. दफ़्तर, लुधियाना पर सुबह 10 बजे धरना देकर रोष प्रदर्शन करेंगे और पाँच हज़ार से अधिक हस्ताक्षरों वाला माँग पत्र डी.सी. लुधियाना को सौंपा जायेगा। धरने की तैयारियाँ ज़ोर शोर के साथ चल रही हैं। एक पर्चा प्रकाशत किया गया है जो कारख़ाना मज़दूर यूनियन के कार्यकर्ता बस्ती में मज़दूरों के कमरे कमरे जा कर बाँट रहे हैं, उनसे माँग पत्र पर हस्ताक्षर करवा रहे हैं और धरने में शामिल होने की अपील कर रहे हैं। माँग पत्र पर अब तक 4758 लोगों के हस्ताक्षर हो चुके हैं।
कारख़ाना मज़दूर यूनियन के संचालक लखविन्दर ने बताया कि गरीबी की जि़ंदगी काटने पर मजबूर इस कालोनी के निवासियों के रिहायशी हालातों की भयंकरता को शब्दों मेंा बयान कर पाना संभव नहीं है। इस कालोनी के सभी निवासी गरीब मज़दूर हैं। उब्बड़-खाबड़ कच्ची गलियाँ, सीवरेज निकासी की उचित व्यवस्था नहीं, गंदे पखाने, चारों तरफ़ कूड़े-गन्दगी-बदबू -मच्छर-मक्खियों का साम्राज्य, पानी की बेहद कम स्पलाई, पीने के लिए दूषित पानी - यह हालत है मज़दूरों की इस बस्ती की। ऐसी हालत में लोगों की सेहत का हाल क्या होगा इसका अंदाज़ा लगाना कोई कठिन नहीं है। इसके अलावा बिजली महकमे से लोग अलग से दुखी हैं। बिजली की खऱाबी ठीक करवानी हो, बिल ज़्यादा आने की शिकायत हल करवानी हो, नया मीटर लगवाना हो - बिजली विभाग के अधिकारी मज़दूरों से सीधे मुँह बात नहीं करते। गलियों में रात के समय के लिए रौशनी का कोई प्रबंध नहीं है। बिजली की 14000 हाईवोलटेज तारें घरों की छतों के बिलकुल ऊपर से गुजरती हैं जिससे हमेशा हादसें होते रहते हैं। राजीव गांधी कालोनी के आस-पास जीवन नगर, शेरपुर, ग्यासपुरा आदि विशाल गरीब आबादी वाले इलाकों के लिए नज़दीक में कोई सरकारी हस्पताल या डिस्पेंसरी नहीं है। राजीव गांधी कालोनी के मज़दूरों की माँग है कि इलाको में सरकारी हस्पताल खोला जाये। औद्योगिक मज़दूरों के लिए खोली गई ई.एस.आई. डिस्पेंसरी का विस्तार किया जाये। पिछले महीने 30 सितम्बर को कालोनी निवासियों की हुई लोग पंचायत में प्रशासन के खि़लाफ़ संघर्ष छेडऩे के ऐलान के बाद यह फ़ैसला किया गया था कि 15 अक्तूबर को डी. सी. दफ़्तर में हजारों कालोनी निवासियों के हस्ताक्षर करवा कर रोषपूर्ण धरना-प्रदर्शन करके माँग पत्र सौंपा जाये। उन्होंने कहा वैसे तो पंजाब सरकार ने लुधियाना शहर के विकास के लिए 3561 रुपए की परियोजना का ऐलान किया है परन्तु राजीव गांधी कालोनी सहित समेत लुधियाना के अलग-अलग गरीब इलाकों के विकास के लिए सरकार कब कदम उठाएगी? उन्होंने कहा कि लुधियाना की बहुसंख्यक आबादी मज़दूरों की है इसलिए सरकार को सब से अधिक ध्यान उनके जीवन के हालात सुधारने की तरफ देना चाहिए। राजीव गांधी कालोनी के बारे में उन्होंने कहा कि यदि सरकार 3561 करोड़ रुपए का कुछ हिस्सा भी इस कालोनी के विकास पर लगा दे तो कालोनी की कायापलट हो सकती है। लखविन्दर ने कहा कि कारख़ाना मज़दूर यूनियन शहर के सभी इंसाफ़पसंद संगठनों, सामाजिक कार्यकर्ताओं, पत्रकारों समेत सभी इंसाफ़पसंद लोगों को उनके समर्थन में आने की अपील करती है।
*विमला सक्करवाल कारख़ाना मज़दूर यूनियन संचालन समिति की सक्रिय सदस्य है
सम्पर्क: मकादूर यूनियन,मकादूर पुस्तकालय, राजीव गाँधी कालोनी,
फोकल प्वाइण्ट-4, लुधियाना।
फोन- 96461-50249 विकास के खोखले दावों की हकीकत अब आयेगी सडकों पर

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विकास के दावों के बीच देखें...किस तरह जिंदा हैं लोग....कैसे शर्मिंदा हैं लोग ....!
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लुधियाना 12 अक्तूबर, 2012:(*विमला सक्करवाल)- लुधियाना के फोकल प्वाइंट फेज़-4 में स्थित मज़दूरों की बस्ती राजीव गांधी कालोनी के लोगों ने बुरी रिहायशी हालतों के प्रति प्रशासन की बेरुख़ी से तंग आकर संघर्ष का रास्ता पकडऩे का ऐलान कर दिया है। राजीव गांधी कालोनी के लोग गलियों पक्की कराने, सीवरेज निकासी के उचित प्रबंध, साफ़-सफ़ाई, साफ़ पानी की नियमित सप्लाई, बिजली सम्बन्धित शिकायतों के निपटारे के उचित प्रबंध समेत अनेकों माँगों के लिए 15 अक्तूबर (सोमवार) को कारख़ाना मज़दूर यूनियन के नेतृत्व में डी.सी. दफ़्तर, लुधियाना पर सुबह 10 बजे धरना देकर रोष प्रदर्शन करेंगे और पाँच हज़ार से अधिक हस्ताक्षरों वाला माँग पत्र डी.सी. लुधियाना को सौंपा जायेगा। धरने की तैयारियाँ ज़ोर शोर के साथ चल रही हैं। एक पर्चा प्रकाशत किया गया है जो कारख़ाना मज़दूर यूनियन के कार्यकर्ता बस्ती में मज़दूरों के कमरे कमरे जा कर बाँट रहे हैं, उनसे माँग पत्र पर हस्ताक्षर करवा रहे हैं और धरने में शामिल होने की अपील कर रहे हैं। माँग पत्र पर अब तक 4758 लोगों के हस्ताक्षर हो चुके हैं।
कारख़ाना मज़दूर यूनियन के संचालक लखविन्दर ने बताया कि गरीबी की जि़ंदगी काटने पर मजबूर इस कालोनी के निवासियों के रिहायशी हालातों की भयंकरता को शब्दों मेंा बयान कर पाना संभव नहीं है। इस कालोनी के सभी निवासी गरीब मज़दूर हैं। उब्बड़-खाबड़ कच्ची गलियाँ, सीवरेज निकासी की उचित व्यवस्था नहीं, गंदे पखाने, चारों तरफ़ कूड़े-गन्दगी-बदबू -मच्छर-मक्खियों का साम्राज्य, पानी की बेहद कम स्पलाई, पीने के लिए दूषित पानी - यह हालत है मज़दूरों की इस बस्ती की। ऐसी हालत में लोगों की सेहत का हाल क्या होगा इसका अंदाज़ा लगाना कोई कठिन नहीं है। इसके अलावा बिजली महकमे से लोग अलग से दुखी हैं। बिजली की खऱाबी ठीक करवानी हो, बिल ज़्यादा आने की शिकायत हल करवानी हो, नया मीटर लगवाना हो - बिजली विभाग के अधिकारी मज़दूरों से सीधे मुँह बात नहीं करते। गलियों में रात के समय के लिए रौशनी का कोई प्रबंध नहीं है। बिजली की 14000 हाईवोलटेज तारें घरों की छतों के बिलकुल ऊपर से गुजरती हैं जिससे हमेशा हादसें होते रहते हैं। राजीव गांधी कालोनी के आस-पास जीवन नगर, शेरपुर, ग्यासपुरा आदि विशाल गरीब आबादी वाले इलाकों के लिए नज़दीक में कोई सरकारी हस्पताल या डिस्पेंसरी नहीं है। राजीव गांधी कालोनी के मज़दूरों की माँग है कि इलाको में सरकारी हस्पताल खोला जाये। औद्योगिक मज़दूरों के लिए खोली गई ई.एस.आई. डिस्पेंसरी का विस्तार किया जाये। पिछले महीने 30 सितम्बर को कालोनी निवासियों की हुई लोग पंचायत में प्रशासन के खि़लाफ़ संघर्ष छेडऩे के ऐलान के बाद यह फ़ैसला किया गया था कि 15 अक्तूबर को डी. सी. दफ़्तर में हजारों कालोनी निवासियों के हस्ताक्षर करवा कर रोषपूर्ण धरना-प्रदर्शन करके माँग पत्र सौंपा जाये। उन्होंने कहा वैसे तो पंजाब सरकार ने लुधियाना शहर के विकास के लिए 3561 रुपए की परियोजना का ऐलान किया है परन्तु राजीव गांधी कालोनी सहित समेत लुधियाना के अलग-अलग गरीब इलाकों के विकास के लिए सरकार कब कदम उठाएगी? उन्होंने कहा कि लुधियाना की बहुसंख्यक आबादी मज़दूरों की है इसलिए सरकार को सब से अधिक ध्यान उनके जीवन के हालात सुधारने की तरफ देना चाहिए। राजीव गांधी कालोनी के बारे में उन्होंने कहा कि यदि सरकार 3561 करोड़ रुपए का कुछ हिस्सा भी इस कालोनी के विकास पर लगा दे तो कालोनी की कायापलट हो सकती है। लखविन्दर ने कहा कि कारख़ाना मज़दूर यूनियन शहर के सभी इंसाफ़पसंद संगठनों, सामाजिक कार्यकर्ताओं, पत्रकारों समेत सभी इंसाफ़पसंद लोगों को उनके समर्थन में आने की अपील करती है।
*विमला सक्करवाल कारख़ाना मज़दूर यूनियन संचालन समिति की सक्रिय सदस्य है
सम्पर्क: मकादूर यूनियन,मकादूर पुस्तकालय, राजीव गाँधी कालोनी,
फोकल प्वाइण्ट-4, लुधियाना।
फोन- 96461-50249 विकास के खोखले दावों की हकीकत अब आयेगी सडकों पर
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